Friday, December 01, 2006

Irshaad....

It's 1.45am.... not at all feeling sleepy and felt like writing one....
So here it is -
मीलें हैं युं आज, बाद बर्सों की जुदाई के;
है लब्ज फ़ीर भी दबे दबे, ईन अश्कों की पर्छाई में.
- Sarang
[लब्ज - words]
[
अश्क - tears]

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